रियल स्टेट
कारोबार में मंदी का दौर जारी
कारोबार। रियल स्टेट कारोबार में बीते चार सालों से शुरू हुई मंदी अब भी जारी है, हालांकि इस वर्ष के शुरूआती दौर में इसके समाप्त होने की उम्मीद की जा रही
थी। लेकिन इससे जुड़े लोग
इसमें कृत्रिम स्थायित्व बनाए बैठे है।कारोबारी दृष्टि से देखे तो इन्हें मंदी नजर
नहीं आ रही है,लेकिन
जमीनी हकीकत मंदी को बया कर रही है।
चार साल तक पहले दलालों के द्वारा कृत्रिम तेजी और कालेधन के बूते जमीनों के दाम आसमान को छूने लगे थे। पिछले कुछ सालों में केन्द्र सरकार के कालेधन पर लगाम लगाने व ई-रजिस्ट्री शुरू किए। जाने के कारण जमीन के कारोबार में गिरावट आई है।इसी कारण पहले क्रयता ज्यादा और विक्रेता कम थे।वर्तमान में विक्रेता ज्यादा और क्रयता कम है। जिससे रियल एस्टेट कारोबार प्रभावित हुआ है।नचार साल पहले तक रियल एस्टेट बाजार में बूम थी। लोग जमीनों और मकानों में निवेश कर रहे थे। दलालों,जमीन के सौदागरों और कालेधन के निवेश के बदौलत जमीन का कारोबार आसमान छूने लगा था। शहर के प्लॉट हो या खेती की जमीन सभी के भाव जरूरतमंदो की पहुंच से बाहर हो गए थे। यह बनावटी तेजी थी, जो लोग मानने को तैयार नहीं है कि कारोबार में किसी प्रकार की मंदी आई है। रियल स्टेट के कारोबार में निर्माण कार्य कम होने की वजह से इस फील्ड से जुड़े लोगों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि यह लोग दूसरे छोटे मोटे काम को करके जीवन यापन कर रहे है।
चार साल तक पहले दलालों के द्वारा कृत्रिम तेजी और कालेधन के बूते जमीनों के दाम आसमान को छूने लगे थे। पिछले कुछ सालों में केन्द्र सरकार के कालेधन पर लगाम लगाने व ई-रजिस्ट्री शुरू किए। जाने के कारण जमीन के कारोबार में गिरावट आई है।इसी कारण पहले क्रयता ज्यादा और विक्रेता कम थे।वर्तमान में विक्रेता ज्यादा और क्रयता कम है। जिससे रियल एस्टेट कारोबार प्रभावित हुआ है।नचार साल पहले तक रियल एस्टेट बाजार में बूम थी। लोग जमीनों और मकानों में निवेश कर रहे थे। दलालों,जमीन के सौदागरों और कालेधन के निवेश के बदौलत जमीन का कारोबार आसमान छूने लगा था। शहर के प्लॉट हो या खेती की जमीन सभी के भाव जरूरतमंदो की पहुंच से बाहर हो गए थे। यह बनावटी तेजी थी, जो लोग मानने को तैयार नहीं है कि कारोबार में किसी प्रकार की मंदी आई है। रियल स्टेट के कारोबार में निर्माण कार्य कम होने की वजह से इस फील्ड से जुड़े लोगों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि यह लोग दूसरे छोटे मोटे काम को करके जीवन यापन कर रहे है।
मंदी का दौर किस
कदर जारी है इसका अनुमान इस साल अप्रैल से शुरू हुई ई रजिस्ट्रियों के आंकड़ों से
लगाया जा सकता है।निर्माण कार्य में लगी एजेंसी के लोग
कहते हैं कि सरकार ने नियमों को लचीला नहीं बनाया, जिसके कारण हमारा लगातार इस कारोबार से मोह भंग हो रहा है फिलहाल, जरूरी है कि सरकार इस क्षेत्र के लिए अपने कानून में थोड़ा
लचीलापन लाए तो जनता को घर भी मिलेगा. कारोबारियों का कारोबार आगे बढ़ेगा तो सरकार
का राजस्व भी बढ़ेगा।
उम्मीद के भरोसे बैठे
है जमीन के सौदागर
जमीन के सौदे में जिन लोगों ने पैसा लगा रखा है। उन्हें उम्मीद है कि इसमें उछाल आएगा,लेकिन जिस तरह केन्द्र सरकार ने कालेधन पर रोक लगाई है।और इनकमटैक्स विभाग ने नगद लेनदेन करने वालों को नोटिस भेजे है।इससे रियल एस्टेट में निवेश करने वाले लोगों की हालत खराब है।कई सौदागरों की पूँजी फंसी पड़ी है,और अधिकांशो के बयाने डूब गये है।जिन लोगों का आर्थिक आधार मजबूत है,वह लोग गले में रजिस्ट्रीया लटकाये इस उम्मीद में बैठे है कि भविष्य में रियल एस्टेट के कारोबार में उछाल आएगा।विशेषज्ञ बताते है कि लगभग एक दशक तक तो इसकी उम्मीद कम ही है।
जमीन के सौदे में जिन लोगों ने पैसा लगा रखा है। उन्हें उम्मीद है कि इसमें उछाल आएगा,लेकिन जिस तरह केन्द्र सरकार ने कालेधन पर रोक लगाई है।और इनकमटैक्स विभाग ने नगद लेनदेन करने वालों को नोटिस भेजे है।इससे रियल एस्टेट में निवेश करने वाले लोगों की हालत खराब है।कई सौदागरों की पूँजी फंसी पड़ी है,और अधिकांशो के बयाने डूब गये है।जिन लोगों का आर्थिक आधार मजबूत है,वह लोग गले में रजिस्ट्रीया लटकाये इस उम्मीद में बैठे है कि भविष्य में रियल एस्टेट के कारोबार में उछाल आएगा।विशेषज्ञ बताते है कि लगभग एक दशक तक तो इसकी उम्मीद कम ही है।
ये हैं अहम समस्याएं :
1. नेचर ऑफ लैंड
मे उलझ जाते हैं बिल्डर और ग्राहक।
2. कमिटमेंट के
मुताबिक सुविधा नही उपलब्ध कराते बिल्डर।
उम्मीद :
ऐसा समझा जाता है कि बारिश का सीजन वैसे ही रियल एस्टेट के कारोबार के लिए
मंदा होता है। उम्मीद है कि दीवाली के पूर्व अक्टूबर माह से रियल एस्टेट के
कारोबार में तेजी आयेंगी।