शनिवार शाम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने किसान हितैषी बनते हुए प्याज और लहसुन को भावांतर योजना में शामिल करने की अधिकारिक
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घोषणा की, और इस पर मक्खन लगाते हुए मीडिया ने भी इस घोषणा को न्योचित बताते हुए खूब सराहा।लेकिन इस घोषणा की वास्तविक मंशा तो चना,मसूर और सरसों को भावांतर से हटाना था प्रदेश सरकार ने भाप लिया था 2017-18 में चने की फसल की बंपर पैदावार से राजस्व में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है जहां भावांतर में चने का मूल्य 4400 रुपये निर्धारित किया गया था लेकिन जिसका बाजार मूल्य करीब 3 हजार रुपए है इतने भारी नुकसान से बचने के लिए भावांतर से चने को हटा दिया गया,और रही बात मसूर और सरसों की गेहूं के साथ घुन पिस गया,साथ ही किसानों में आक्रोश पैदा न हो जिसके लिए प्याज और लहसुन को भावांतर में शामिल कर दिया और वैसे भी जब प्रदेश सरकार पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए कर्ज हो तो सरकार किसानों का बाद में पहले खुद का फायदा देखेगी।