Monday, March 26, 2018

'किसानों के साथ छलावा और दिखावा कर रही,शिवराज सरकार'

शनिवार शाम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने किसान हितैषी बनते हुए प्याज और लहसुन को भावांतर योजना में शामिल करने की अधिकारिक
File photo
घोषणा की, और इस पर मक्खन लगाते हुए मीडिया ने भी इस घोषणा को न्योचित बताते हुए खूब सराहा।लेकिन इस घोषणा की वास्तविक मंशा तो चना,मसूर और सरसों को भावांतर से हटाना था प्रदेश सरकार ने भाप लिया था  2017-18 में  चने की फसल की बंपर पैदावार से राजस्व में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है  जहां भावांतर में चने का मूल्य 4400  रुपये निर्धारित किया गया था लेकिन जिसका  बाजार मूल्य करीब 3 हजार रुपए  है इतने भारी नुकसान से बचने के लिए भावांतर से चने को हटा दिया गया,और रही बात मसूर और सरसों की गेहूं के साथ घुन पिस गया,साथ ही किसानों में आक्रोश पैदा न हो जिसके लिए प्याज और लहसुन को भावांतर में शामिल कर दिया और वैसे भी जब प्रदेश सरकार पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए कर्ज हो तो सरकार किसानों का बाद में पहले खुद का फायदा देखेगी।

Friday, March 2, 2018

युवा, किसान और जवान को अच्छे दिनों का इंतजार.....

FILE PHOTO

आज से तकरीबन 4 साल पहले  चुनाव के दौरान बीजेपी सरकार ने  देश की  जनता को  एक सपना दिखाया था सपना था अच्छे दिनों का। वही देश के युवा को सपना दिखाया था रोजगार और आधुनिक भारत का । लेकिन देश के हालात और बीजेपी सरकार के वादे इन 4  सालों में सब तितर-वितर हो गए देश हिन्दु-मुस्लिम और रोजगार पकौड़ों पर आकर अटक गया,जहां सरकार ने वादा  किया था सरकार बनने के बाद देश में प्रतिवर्ष 1 करोड़ लोगों के लिए  रोजगार का सृजन किया जाएगा, लेकिन सरकार बनने  के बाद का आंकड़ा 7 लाख से घटकर  2 लाख पर पहुंच गया। हालात ऐसे हो गए है कि मध्यप्रदेश में 10 हजार दो सौ पटवारी के पद निकलते है और आवेदन लगभग 10 लाख लोग करते है इससे बेरोजगारी के आंकड़े को सीधे तौर पर समझा जा सकता है, और देश के किसानों की हालत का अनुमान तो इसी से लगा सकते है कि हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने चौकाने वाले आंकड़े जारी किए जिनके मुताबिक देश में प्रतिवर्ष 12 हजार किसान कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या कर रहे है, साथ ही ब्यूरो के आंकड़े बताते है कि किसानों की आत्महत्या के मामले में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सबसे ऊंचे स्तर पर है वही देश के बहादुर सैनिकों को भी अच्छे दिनों का इंतजार  है कि देश को तो आजादी तो मिल गई लेकिन उन्हे कब देश  के लिए कुछ कर गुजरने की आजादी  मिलेगी । क्या ऐसे ही कश्मिरियों के जुर्म सहते रहेंगे? या फिर सैनिकों को आधुनिक हथियार  मुहैया कराने के नाम पर सरकार राफेल जैसे घोटाले कर अमीरों की जेब भरती रहेगी, वैसे  देखा जाए तो अच्छे दिनों का इंतजार तो देश के हर वर्ग को है लेकिन पता नहीं लोगों का अच्छे दिनों का सपना कब पूरा होगा।
लेख-अखिलेश कुशवाह