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आज
से तकरीबन 4 साल पहले चुनाव के दौरान
बीजेपी सरकार ने देश की जनता को
एक सपना दिखाया था सपना था अच्छे दिनों का। वही देश के युवा को सपना दिखाया
था रोजगार और आधुनिक भारत का । लेकिन देश के हालात और बीजेपी सरकार के वादे इन
4 सालों में सब तितर-वितर हो गए देश
हिन्दु-मुस्लिम और रोजगार पकौड़ों पर आकर अटक गया,जहां सरकार ने वादा किया था सरकार बनने के बाद देश में प्रतिवर्ष 1
करोड़ लोगों के लिए रोजगार का सृजन किया
जाएगा, लेकिन सरकार बनने के बाद का आंकड़ा
7 लाख से घटकर 2 लाख पर पहुंच गया। हालात
ऐसे हो गए है कि मध्यप्रदेश में 10 हजार दो सौ पटवारी के पद निकलते है और आवेदन
लगभग 10 लाख लोग करते है इससे बेरोजगारी के आंकड़े को सीधे तौर पर समझा जा सकता है,
और देश के किसानों की हालत का अनुमान तो इसी से लगा सकते है कि हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने
चौकाने वाले आंकड़े जारी किए जिनके मुताबिक देश में प्रतिवर्ष 12 हजार किसान कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या
कर रहे है, साथ ही ब्यूरो के आंकड़े बताते है कि किसानों की आत्महत्या के मामले में
मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सबसे ऊंचे स्तर पर है वही देश के बहादुर सैनिकों को भी अच्छे दिनों
का इंतजार है कि देश को तो आजादी तो मिल
गई लेकिन उन्हे कब देश के लिए कुछ कर
गुजरने की आजादी मिलेगी
। क्या ऐसे ही कश्मिरियों के जुर्म सहते रहेंगे?
या फिर सैनिकों को आधुनिक हथियार मुहैया कराने के नाम पर सरकार राफेल जैसे
घोटाले कर अमीरों की जेब भरती रहेगी, वैसे
देखा जाए तो अच्छे दिनों का इंतजार तो देश के हर वर्ग को है लेकिन पता नहीं
लोगों का अच्छे दिनों का सपना कब पूरा होगा।
लेख-अखिलेश कुशवाह

nice blog
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