नई शुरूआत
Tuesday, December 6, 2022
ऋषिकेश यात्रा
“सफ़र” का मतलब सिर्फ एक शहर से दूसरे शहर, एक देश से दूसरे देश की यात्रा करना नहीं है, इसका मतलब है कि हम कैसे रहते हैं, हम कैसे समस्याओं से निपटते हैं, अनुभव प्राप्त करते हैं, साथ ही दुनिया की खोज कैसे करते हैं, हम खुद को कैसे तलाशते है, लंबे अरसे के बाद मन रोजमर्रा के कामकाज और जिम्मेदारियों से अलग कुछ समय के लिए किसी सुकून वाली जगह की तलाश में था, और आख़िरकार हम ऋषिकेश पहुंच गए, मेरी तलाश यहां ख़त्म हुई।
Wednesday, May 5, 2021
हिस्सों में जिंदगी
हम गांव के बच्चे ज़िंदगी को हिस्सों में जीते हैं । और हमारी ज़िंदगी के हिस्से ख़त्म होकर शुरू नहीं होते, शूरू होकर ख़त्म हो जाते हैं । मतलब ज़िंदगी के किसी हिस्से को छोड़कर अगले हिस्से में नहीं जाते हैं हम, बल्कि अगले हिस्से में जाते हैं, तो पिछला छूट जाता है। थोड़ा कठिन हो गया ना चलिए आसान बनाते हैं।
गांव से शहर जाते हैं तो गांव छूट जाता है । छोड़कर नहीं जाते, हां लेकिन छूट जाता है । छूट जाता है वो आंगन जहां घुटनों के बल चलना सीखा था । वो छत भी छूट जाती है जहां लेटकर आसमान को देखते हुए तारे गिना करते थे । गांव की गलियां, खेत-खलियान, बाग-बगीचा, ताल-तलैया सब छूट जाता है। गांव के बाहर वाला तिराहा, तिराहे पर समोसे वाली दुकान भी छूट जाती है । बचपन के दोस्त छूट जाते हैं । बाबा की बातें छूट जाती हैं । अम्मा के किस्से छूट जाते हैं। और छूट जाता है बचपन भी । हां लेकिन, ये सब छोड़कर हम शहर नहीं जाते, ये सब छूट जाता है, जब हम शहर जाते फिर शहर से बड़े शहर जाते हैं, तो शहर छूट जाता है ।
छोड़कर नहीं जाते, हां लेकिन छूट जाता है । छूट जाता है किराये का वो कमरा, जहां दोस्तों के साथ तहरी पकाते थे । छूट जाती है वो मेज-कुर्सी जिसपर बैठकर रट्टा लगाते थे । वो रहती है जिस कॉलोनी में उसमें आना-जाना छूट जाता है । चाय का वो अड्डा छूट जाता है, जहां शर्मा जी और वर्मा जी सरकारी नौकरी के आवेदनों पर चर्चा किया करते थे । शहर की वो टॉकीज़ भी छूट जाती है, जहां दोस्तों के साथ पहली फिल्म देखी थी । और छूट जाता है वो बस स्टॉप भी, जहां से गांव की बस मिला करती थी । हां लेकिन, ये सब छोड़कर बड़े शहर नहीं जाते हम, ये सब छूट जाता है, जब बड़े शहर जाते हैं हम ।
और फिर बड़े शहर में तो बहुत कुछ छूट जाता है, बस बड़ा शहर नहीं छूटता । तब तक जब तक ज़िंदगी नहीं छूटती ।
Monday, August 12, 2019
ओहे लड़के... इस राखी घर लौट आना
घर से दो कदम दूर ही चला था कि इतने में पीछे से आवाज आई...सुन पिछली राखी काम का बहाना बनाकर घर की तरफ मुंह नहीं किया था इस बार ऐसा नहीं चलेगा....ओर ये मुझे पोस्ट कार्ड, पेटीएम वाला रक्षा बंधन तो बिल्कुल पसंद नहीं...जब तक खुद के हाथों से तुम्हारी कलाई पर राखी न बांधू तब तक ये रक्षा बंधन अधूरा सा लगता है...और ये फोन पर ठीक से लड़कर अपना हक भी तो नहीं निकलता...इस बार मुझे ये नहीं सुनना की सॉरी...अगले रक्षा बंधन जरुर आ जाऊंगा...वैसे गर्लफ्रेंड के लिए तो रातों रात मुझ से उधारी लेकर ट्रेन के जनरल कोच से उसके शहर तक पहुंच जाता था...लेकिन जब मैं राखी पर बोलती हूं बहानों का अंबार लगा देता है...अगर इस बार राखी पर तू मुझे नहीं दिखा तो तेरी सारी करतूत पापा के सामने होंगी...
Monday, March 26, 2018
'किसानों के साथ छलावा और दिखावा कर रही,शिवराज सरकार'
शनिवार शाम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने किसान हितैषी बनते हुए प्याज और लहसुन को भावांतर योजना में शामिल करने की अधिकारिक
घोषणा की, और इस पर मक्खन लगाते हुए मीडिया ने भी इस घोषणा को न्योचित बताते हुए खूब सराहा।लेकिन इस घोषणा की वास्तविक मंशा तो चना,मसूर और सरसों को भावांतर से हटाना था प्रदेश सरकार ने भाप लिया था 2017-18 में चने की फसल की बंपर पैदावार से राजस्व में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है जहां भावांतर में चने का मूल्य 4400 रुपये निर्धारित किया गया था लेकिन जिसका बाजार मूल्य करीब 3 हजार रुपए है इतने भारी नुकसान से बचने के लिए भावांतर से चने को हटा दिया गया,और रही बात मसूर और सरसों की गेहूं के साथ घुन पिस गया,साथ ही किसानों में आक्रोश पैदा न हो जिसके लिए प्याज और लहसुन को भावांतर में शामिल कर दिया और वैसे भी जब प्रदेश सरकार पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए कर्ज हो तो सरकार किसानों का बाद में पहले खुद का फायदा देखेगी।
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Friday, March 2, 2018
युवा, किसान और जवान को अच्छे दिनों का इंतजार.....
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आज
से तकरीबन 4 साल पहले चुनाव के दौरान
बीजेपी सरकार ने देश की जनता को
एक सपना दिखाया था सपना था अच्छे दिनों का। वही देश के युवा को सपना दिखाया
था रोजगार और आधुनिक भारत का । लेकिन देश के हालात और बीजेपी सरकार के वादे इन
4 सालों में सब तितर-वितर हो गए देश
हिन्दु-मुस्लिम और रोजगार पकौड़ों पर आकर अटक गया,जहां सरकार ने वादा किया था सरकार बनने के बाद देश में प्रतिवर्ष 1
करोड़ लोगों के लिए रोजगार का सृजन किया
जाएगा, लेकिन सरकार बनने के बाद का आंकड़ा
7 लाख से घटकर 2 लाख पर पहुंच गया। हालात
ऐसे हो गए है कि मध्यप्रदेश में 10 हजार दो सौ पटवारी के पद निकलते है और आवेदन
लगभग 10 लाख लोग करते है इससे बेरोजगारी के आंकड़े को सीधे तौर पर समझा जा सकता है,
और देश के किसानों की हालत का अनुमान तो इसी से लगा सकते है कि हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने
चौकाने वाले आंकड़े जारी किए जिनके मुताबिक देश में प्रतिवर्ष 12 हजार किसान कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या
कर रहे है, साथ ही ब्यूरो के आंकड़े बताते है कि किसानों की आत्महत्या के मामले में
मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सबसे ऊंचे स्तर पर है वही देश के बहादुर सैनिकों को भी अच्छे दिनों
का इंतजार है कि देश को तो आजादी तो मिल
गई लेकिन उन्हे कब देश के लिए कुछ कर
गुजरने की आजादी मिलेगी
। क्या ऐसे ही कश्मिरियों के जुर्म सहते रहेंगे?
या फिर सैनिकों को आधुनिक हथियार मुहैया कराने के नाम पर सरकार राफेल जैसे
घोटाले कर अमीरों की जेब भरती रहेगी, वैसे
देखा जाए तो अच्छे दिनों का इंतजार तो देश के हर वर्ग को है लेकिन पता नहीं
लोगों का अच्छे दिनों का सपना कब पूरा होगा।
लेख-अखिलेश कुशवाह
Wednesday, October 5, 2016
खोज असली भारत की
घुम्मकड़ी की आदत से मजबूर होने के कारण इस बार जा पहुँचे हम विदिशा जिले के तब्बकलपुर गाँव स्थित सरकारी स्कूल, सोचा आज यहाँ भी घूम लिया जाये।
तो फिर क्या था स्कूल के गेट के सामने गाड़ी रूकते ही स्कूल की तरफ देखकर लगा देश में तो 19 वी सदी चल रही है और हम फालतू में किताबों में 21 वी सदीं का नारा लगाये बैठे है फिर याद आया नहीं भाई आधे देश में 21 वी सदीं है और आधे देश में तो अभी 19 वी सदी ही चल रही है
स्कूल का नजारा देखकर लगा। क्या स्कूल ऐसा भी होता है?
इसके आगे क्या कहूँ तस्वीरों से समझ जायें।
Thursday, September 8, 2016
“इंटरकनेक्ट बैडविड्थ” के लिए अदालत जायेगा। जियो
(By-Akhilesh Kushwah)
देश का शायद यह पहला
मामला होगा जब दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी तमाम छोटी- बड़ी कम्पनियों ने रिलायंस जयो
को अतिरिक्त इंटरकनेक्ट बैडविड्थ देने से
मना कर दिया। दूरसंचार कम्पनियों का यह कदम दूरसंचार लाइंसेस के प्रावधान के खिलाफ
है जिसमें इंटरकनेक्ट पॉइट देना कानूनी तौर पर अनिवार्य है आपको पता हो कि रिलायंस
जियो ने देश में मोबाइल सेवा शुरू करने के पहले ही देश भर में फ्री वॉयस कॉल पर
कोई शुल्क नहीं लेने का ऐलान कर दिया था
मुकेश अंबानी की कम्पनी रिलायंस जियो को दूरसंचार विभाग की तरफ
से भेजे गये खत में कहा कि ट्राई अधिनियम 1997 की धारा 11(1) बी के मुताबिक
विभिन्न सेवा प्रदाताओं के बीच इंटरकनेक्टिविटी से संबंधित मामला ट्राई के अधिकार
क्षेत्र में आता हैं दूरसंचार विभाग ने कहा की इंटरकनेक्टिविटी विवाद का समाधान
संबंधित पक्षों की सहमति से किया जायेंगा।
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