Sunday, March 13, 2016

"खुशियाँ"

खशियों के भी कई रूप होते है,
कई रंग ओर ठंग होते है।

जैसे माँ का प्यार,

पापा का दुलार,

अपनो का साथ,

पहले प्यार का अहसास।

बचपन के हठ,

गाँव के नट,

गली में रौव,

शहर में धौव।

गली का मोड़,

दोस्तों का शोर,

उसकी की हाय,

चाचा की चाय।

मेलों की मस्ती,

ठंडो की चुस्ती,

बर्फ के गोले,

बरसात के ओले।

टीचर की छडी,

हाथ की घड़ी,

परीक्षा की चिंता,

रिजल्ट का इंतजार।

                      #मुसाफिर

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