वहीं बसंत फिर हैं
आया,
पेंड-पौधो के संग मे उसने,
धरा को है खूब सजाया।
हुआ बसंत का आगमन,
बोले है कोयलियाँ।
शीत लहर आयी है जैसे,
रोमे-रोम थिरकाया।
मन में भरी उमंग,
जैसे खुशियों को शैलाया।
प्रकृति ने ओढी चादर,
चारों ओर फैलायी।
वायु में भी गंध,
हल्की-हल्की आयी।
खेतों में लहरायी फसलें,
हरियाली है छायी।
देख बसंत का आगमन,
अखि हैं मुस्काये बोले,
देखो वही बसंत फिर है आया। #मुसाफिर
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