Thursday, March 17, 2016

"आया बसंत"

वहीं बसंत फिर हैं आया,

खुशियाँ अपने संग में लाया।


पेंड-पौधो के संग मे उसने,

धरा को है खूब सजाया।

हुआ बसंत का आगमन,

बोले है कोयलियाँ।

शीत लहर आयी है जैसे,

रोमे-रोम थिरकाया।

मन में भरी उमंग,

जैसे खुशियों को शैलाया।

प्रकृति ने ओढी चादर,

चारों ओर फैलायी।

वायु में भी गंध,

हल्की-हल्की आयी।

खेतों में लहरायी फसलें,

हरियाली है छायी।

देख बसंत का आगमन,

अखि हैं मुस्काये बोले,

देखो वही बसंत फिर है आया।                      #मुसाफिर

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